Shardiya Navratri 2020 : गुजरात में इस शक्तिपीठ के पास मौजूद हैं मां दुर्गा के पैरों और रथ के निशान - jeevan-mantra

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Monday, October 19, 2020

Shardiya Navratri 2020 : गुजरात में इस शक्तिपीठ के पास मौजूद हैं मां दुर्गा के पैरों और रथ के निशान

नवरात्रि यानि देवी शक्ति के पूजन के दिन, जब हर कोई मां आदिशक्ति की साधना में लीन रहता है। वहीं इन नौ दिनों में देवी मां के नौ रूपों का स्मरण उनकी पूजा की जाती है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देश के पश्चिमी हिस्से यानि गुजरात में मौजूद है। दरअसल गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तालुका में अम्बाजी का मंदिर बना हुआ है।

यह एक बेहद प्राचीन है। इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता के अनुसार यही वह जगह है जहां देवी मां सती का हृदय गिरा था। इसका उल्लेख "तंत्र चूड़ामणि" में भी मिलता है।

इसके अलावा यहां मां का एक श्रीयंत्र भी स्थापित है। इस श्रीयंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां साक्षात विराजी हैं। अम्बाजी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था। वहीं भगवान राम भी शक्ति की उपासना के लिए यहां आ चुके हैं।

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वहीं गब्बर पर्वत के शिखर पर बने देवी के एक छोटे से मंदिर की पश्चिमी छोर पर दीवार बनी है। यहां नीचे से 999 सीढ़ियों के जीने से पहाड़ी पर पहुंचा जा सकता है। माता श्री अरासुरी अम्बिका के निज मंदिर में श्री बीजयंत्र के सामने एक पवित्र ज्योति अटूट प्रज्ज्वलित रहती है।

ऐसे पहुंचें यहां-
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित विख्यात तीर्थस्थल अम्बाजी मंदिर मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। अम्बाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। आप यहां राजस्थान या गुजरात जिस भी रास्ते से चाहें पहुंच सकते हैं।

यहां से सबसे नजदीक स्टेशन माउंटआबू का पड़ता है। आप अहमदाबाद से हवाई सफर भी कर सकते हैं। अम्बाजी मंदिर अहमदाबाद से 180 किलोमीटर और माउंटआबू से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

अम्बाजी मंदिर : शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा
अम्बाजी का मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरावली शृंखला के आरासुर पर्वत पर स्थित है, जो देश का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है। श्री अंबाजी मंदिर की वर्तमान संरचना के निर्माण बारे में माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में वल्लभी के सूर्यवंशी राजा अरुण सेन ने करवाया था। लेकिन अगर इस मंदिर के इससे भी पूर्व के इतिहास की बात करें तो पता चलता है कि 1200 ईसवी में यहां इससे भी भव्य मंदिर हुआ करता था जिसको मुगलों ने लुटपाट के बाद नष्ट कर दिया था।

जिसके बाद इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है। श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है, मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं। सफेद संगमरमर से बना ये मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर 103 फीट ऊंचा है। शिखर सोने से बना है। ये मंदिर की खूबसूरती बढ़ाता है। यहां विदेशों से भी भक्त दर्शन करने आते हैं। ये 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां मां सती का हृदय गिरा था। इसका उल्लेख "तंत्र चूड़ामणि" में भी मिलता है।

मंदिर के पीछे की ओर प्राचीन काल का पवित्र मानसरोवर तालाब भी मौजूद है। कहा जाता है कि इस सरोवर का निर्माण अहमदाबाद के श्री तपिशंकर ने वर्ष 1584 से 1594 के मध्य करवाया था।

अखंड ज्योत : मां अम्बा की पूजा श्रीयंत्र की आराधना से
कहने को तो यह मंदिर भी शक्ति पीठ है पर इस मंदिर के गर्भगृह में मां की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। शक्ति के उपासकों के लिए यह मंदिर बहुत महत्व रखता है। इसके अलावा इस मंदिर में मां अम्बा की पूजा श्रीयंत्र की आराधना से होती है जिसे सीधे आंखों से देखा नहीं जा सकता। यहां के पुजारी इस श्रीयंत्र का श्रृंगार इतना अद्भुत ढंग से करते हैं कि श्रद्धालुओं को लगता है कि मां अंबा जी यहां साक्षात विराजमान हैं। इसके पास ही पवित्र अखण्ड ज्योति जलती है, जिसके बारे में कहते हैं कि यह कभी नहीं बुझी।

गब्बर पहाड़ है खास
मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर गब्बर नामक पहाड़ है। इस पहाड़ पर भी देवी मां का प्राचीन मंदिर स्थापित है। माना जाता है यहां एक पत्थर पर मां के पदचिह्न बने हैं। पदचिह्नों के साथ-साथ मां के रथचिह्न भी बने हैं। अम्बाजी के दर्शन के उपरान्त श्रद्धालु गब्बर जरूर जाते हैं। हर साल भाद्रपदी पूर्णिमा के मौके पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा होते हैं। भाद्रपदी पूर्णिमा को इस मंदिर में एकत्रित होने वाले श्रद्धालु पास में ही स्थित गब्बरगढ़ नामक पर्वत श्रृंखला पर भी जाते हैं, जो इस मंदिर से दो मील दूर पश्चिम की दिशा में स्थित है। प्रत्येक माह पूर्णिमा और अष्टमी तिथि पर यहां मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां फोटोग्राफी निषेध है।

ऐसे पहुंचें देवी मां के दरबार-
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित विख्यात तीर्थस्थल अम्बाजी मंदिर मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। अम्बाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। आप यहां राजस्थान या गुजरात जिस भी रास्ते से चाहें पहुंच सकते हैं।

यहां से सबसे नजदीक स्टेशन माउंटआबू का पड़ता है।

आप अहमदाबाद से हवाई सफर भी कर सकते हैं। अम्बाजी मंदिर अहमदाबाद से 180 किलोमीटर और माउंटआबू से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।



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