इस समय पूरी दुनिया कोरोना के कहर से तिलमिला रही है, पर क्या आप जानते है कि हिंदू धर्मशास्त्रों स्पष्ट उल्लेख है कि नवरात्र से पहले संसार में रोग व महामारी फैलने की आशंका रहती है।
इस संबंध में मान्यता है कि इस समय यमराज अपना मुख खोलते हैं। वहीं इस दौरान यानि नवरात्र में मां भगवती का पूजा पाठ करने से देवी मां मानव के दुख हर लेती हैं।
इस संबंध में धर्मशास्त्रों व ज्योतिष के जानकार सीएस पाठक के अनुसार कुछ हिंदू शास्त्रों में कहा गया कि साल में दोनों नवरात्र बसंत और शरद के समय यमराज अपना मुख खोलते हैं। उनके मुख खोलने से संसार में रोग, महामारी व निराशा का भाव व्याप्त हो जाता है। ऐसे में नवरात्र के समय मां भगवती की पूजा की जाती है और देवी मां से स्वस्थ जीवन प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
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इस समय पूरी दुनिया कोरोना के कहर से तिलमिला रही है, पर क्या आप जानते है कि हिंदू धर्मशास्त्रों स्पष्ट उल्लेख है कि नवरात्र से पहले संसार में रोग व महामारी फैलने की आशंका रहती है।
इस संबंध में मान्यता है कि इस समय यमराज अपना मुख खोलते हैं। वहीं इस दौरान यानि नवरात्र में मां भगवती का पूजा पाठ करने से देवी मां मानव के दुख हर लेती हैं।
इस संबंध में धर्मशास्त्रों व ज्योतिष के जानकार सीएस पाठक के अनुसार कुछ हिंदू शास्त्रों में कहा गया कि साल में दोनों नवरात्र बसंत और शरद के समय यमराज अपना मुख खोलते हैं। उनके मुख खोलने से संसार में रोग, महामारी व निराशा का भाव व्याप्त हो जाता है। ऐसे में नवरात्र के समय मां भगवती की पूजा की जाती है और देवी मां से स्वस्थ जीवन प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
माना जाता है कि इन नौ दिन पूजा-पाठ करने से देवी मां संसार में फैली महामारी, दुख-तकलीफ को दूर करती हैं। पाठक के अनुसार हिंदू धर्मग्रथों में अनेक विपदाओं का पहले से ही उल्लेख किया गया है।
नवरात्रि से पहले हुई घटनाएं!
- स्वाइन फ्लू : यह भारत में मार्च 2015 में फैला था, जिसमें गुजरात ,राजस्थान और अब दिल्ली भी चपेट में आए।
- इबोला: मार्च 2014 में इस रोग के एजेंट को इबोला विषाणु के रूप में पहचाना गया। स्पेन, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका में भी इस रोग के मामले देखे गए। कुल मिलाकर, 13 अप्रैल 2016 तक 11,325 सत्यापित, संभावित और संदिग्ध मृत्यु की घटनाएं दर्ज की गईं। ईवीडी के कुल मामलों की संख्या 28,652 रही।
जानकारों का कहना है ऐसी कई महामारियां या विपदाएं नवरात्रि से पहले आती रहीं हैं। वहीं यदि ये बीमारियां कुछ समय पहले भी सामने आईं हैं, तो भी मौतों का आंकड़ा इस दौरान सबसे ज्यादा रहा है। इस तरह इन घटनाओं को यमराज के मुंह खोलने से जोड़कर देखा जाता है।
उनका कहना है कि नवरात्र में पूजा पाठ का राशियों पर भी विशेष प्रभाव पड़ता है। अत: प्रत्येक राशि के जातक को आवश्यक उपाय करने चाहिए।
जानें राशियों पर प्रभाव और उपाय
1. मेष: यह नवरात्र उत्साहवर्द्धक रहेगा। लेकिन कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, उनका डटकर सामना करें। व्यापारी वर्ग धैर्य बनाये रखें।
उपाय: हनुमान भगवान का पूजन करें।
2. वृषभ : स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव की संभावना है।
उपाय: दिव्यांगों की सहायता करने के साथ ही वस्त्र, पुस्तक, सफेद वस्तु दान करें।
3. मिथुन: उत्तम अवसर की प्राप्ति अप्रैल के प्रथम सप्ताह में हो सकती है। जबकि अंत में स्वास्थ्य कष्ट की संभावना है। वहीं इस कष्ट के बाद सुख की प्राप्ति होगी।
उपाय: विष्णु सहस्त्र जाप पाठ करें। हो सके तो हर रोज कुत्ते को खाना भी खिलाएं।
4. कर्क: आर्थिक रूप से प्रगति का समय है। खान-पान के साथ ही पति-पत्नी अपने रिश्ते का भी ध्यान रखें।
उपाय: हर रोज आदित्यहृदय स्रोत का पाठ के अलावा सोमवार या पूर्णिमा का व्रत करें।
5. सिंह: विद्यार्थी के लिए कठिन समय, ऐसे में संतान पक्ष से चिंता रहेगी। महिलाओं के लिए अच्छा रहेगा।
उपाय: लाल वस्तु का दान करने के अलावा बड़ों का सम्मान करें। साथ ही सूर्य को अर्घ्य दें।
6. कन्या: समय ठीक नहीं है, स्वास्थ्य समस्याएं के साथ ही व्यापार में मंदी की स्थिति रहेगी। बंधुजनों से भी निराशा मिल सकती है।
उपाय: कन्या पूजन के अलावा हरी वस्तु का दान करें। महिलाओं (बेटी, बुआ, बहन) का सम्मान करें।
7. तुला: स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के बीच कहीं बाहर जाने का योग बन रहा है। आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
उपाय: मां दुर्गा की उपासना के साथ ही हर रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करें। गाय, गंगा मां की पूजा करें।
8. वृश्चिक: व्यापार में उतार-चढ़ाव के बीच शुभ कार्य सिद्ध साबित होंगे। लाभ की प्राप्ति होगी।
उपाय: मंगलवार को व्रत के अलावा हर रोज हनुमान का पूजा-पाठ करें।
9. धनु: स्वास्थ्य चिंताओं के बीच संतान पक्ष से सहयोग मिलेगा। मांगलिक कार्य होंगे।
उपाय: हर रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बड़े पीपल वृक्ष की पूजा करें। केला ,बेसन लड्डू व मुनक्का का दान करें।
10. मकर: पेट दर्द के साथ ही करीबियों से अनबन रहेगी। प्रवास का योग के चलते नए व्यवसाय में लाभ रहेगा।
उपाय: सुबह सूर्योदय से पहले या शाम सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करे ।
11. कुम्भ: संघर्षमयी समय है, पत्नी के स्वास्थ्य के कारण चिंतित रहेंगे। माता-पिता के कष्ट के चलते दौड़ भाग करनी पड़ेगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।
उपाय: शनिदेव की पूजा के अलावा हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें। गाय, कौए को भोजन कराएं व अनाथालय में सेवा करें।
12. मीन: आय में बढ़ोत्तरी के बीच सुखमय माहौल रहेगा। इसे अलावा सरकारी कार्यों में अड़चनों के बीच शरीर मे थोड़ी दिक्कत भी आ सकती है।
उपाय: बृहस्पतिवार का व्रत करने के साथ ही केले, हल्दी, चन्ने की दाल का दान करें। महिलाओं का आदर करें।
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