महाशिवरात्रि पर्व हिंदू धर्म के लिये बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये तरह तरह के उपाय किये जाते हैं इसके साथ ही शिव जी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि मनाई जाती है।
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शिव जी का इस दिन माता पार्वती से विवाह हुआ था। इसलिये इस अवसर पर देशभर में शिव बारात भी निकालने की परंपरा निभाई जाती है। इसके अलावा भगवान शिव को शिवरात्रि के दिन कुछ चीजें चढ़ाकर प्रसन्न किया जाता है। आइए जानते हैं क्या चढ़ाएं भगवान शिव को इस दिन....
भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र का महत्व
शिव जी को बेलपत्र बहुत प्रिय माना गया है, बेलपत्र की महिमा का वर्णन शिवपुराण में भी मिलता है। वहीं बेलपत्र को अगर शिव जी की पूजा में बेलपत्र ना होतो पूजा अधूरी मानी जाती है। यही नहीं भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र चढ़ाने के साथ ही बेल के पेड़ की जड़ को रखकर शिव जी को भोग लगाया जाए या फिर शिव जी के भक्तों को भाजन कराया जाए तो इससे कई गुना करोड़ों पुण्य की प्राप्ति होती है।
शिवरात्रि पर भांग के पत्ते का महत्व
भगवान शिव को भांग प्रिय बताई गई है और भांग शिव जी की पूजा में बहुत महत्व भी रखते हैं। इसलिये शिव पूजा में भांग का उपोयग किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है भगवान शिव नें समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान किया था, इसके बाद उनके इलाज में भांग के पत्तों का उपयोग किया गया था। इसलिये शिवजी की पूजा में भांग के पत्तों का विशेष महत्व माना जाता है।
शिव पूजा में जरुर उपयोग करें आक के पत्ते
शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा में आक के पत्तों का उपयोग किया जाता है। भोलेबाबा को आक के पत्तों के साथ-साथ फूल भी बहुत प्रिय हैं। इसलिये शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को आक के पत्ते अर्पित करना चाहिये, ये पत्ते आपकी अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं।
धतूरा फल और पत्ते
धतूरे का फल और पत्ता दोनों ही पूजा में प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग भी मुख्य रूप से औषधि के रूप में होता है। शिव पुराण में बताया गया है कि शिवजी को धतूरा अतिप्रिय है। अधूरा अर्पित करने वाले भक्तों का घर धन और धान्य से भरा रहता है।
दूर्वा चढ़ाएं
भगवान शिव और उनके पुत्र गणेशजी को भी दूर्वा खासी प्रिय होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसमें अमृत बसा होता है। भगवान शिव को दूर्वा चढ़ाने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
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