भगवान शिव के 'तीन अंकों' का रहस्य आप जानते हैं क्या? - jeevan-mantra

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Thursday, February 20, 2020

भगवान शिव के 'तीन अंकों' का रहस्य आप जानते हैं क्या?

21 फरवरी को महाशिवरात्रि है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस मौके पर हम आपको भगवान शिव से जुड़े एक ऐसे रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे शायद आप नहीं जानते होंगे।

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दरअसल, भगवान शिव के साथ 'तीन अंक' का रहस्य जुड़ा है। जैसे भगवान शिव के त्रिशूल में तीन शूल है। शिव की तीन आंखे हैं। शिव के माथे पर तीन रेखाओं वाला त्रिपुंड होता है। इसके अलावे भगवान शिव पर चढ़ने वाला बेल पत्र भी तीन पत्तियों वाला होता है।


त्रिशुल

भगवान शिव के हाथ में हमेशा त्रिशूल रहता है। शिवजी का त्रिशूल तीनों लोक को दर्शाता है, जिसमें आकाश, धरती और पाताल आते हैं। इसके अलावा ये भी मान्यता है कि त्रिशूल तीन गुण को भी दर्शाता है, जिनके बारे में भागवत गीता में बताया गया है। जिसका अर्थ होता है तामसिक गुण, राजसिक गुण और सात्विक गुण।


भगवान शिव के तीन नेत्र

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव की तीन आंखे हैं। शिव की आंखें तपस्या दिखाती है। तपस्या का उद्देश्य सत, चित्त, आनंद है, जिसका मतलब होता है पूर्ण सत्य, शुद्ध चेतना और पूर्ण आनंद।


शिव के माथे पर त्रिपुंड

भगवान शिव के माथे का त्रिपुंड सांसारिक लक्ष्य को दर्शाता है, जिसमें आत्मरक्षण, आत्मप्रचार और आत्मबोध आते हैं। अर्थात व्यक्तित्व निर्माण, उसकी रक्षा और उसकी विकास।


बेल पत्र

अक्सर हम शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाते हैं। माना जाता है कि बेल पत्र तीन शरीर को दर्शाता है। आम शब्दों में कहे तो इसका अर्थ तम, रज और सत गुणों से है।



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